“प्रधान पति” परंपरा को खत्म कर महिला नेतृत्व को सशक्त बनाना जरूरी – निदेशक निधि यादव

देहरादून : स्थानीय सुशासन को अधिक सशक्त, समावेशी एवं उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से “बदलाव का नेतृत्वः स्थानीय सुशासन और उसके परे महिला नेतृत्व को सशक्त बनाना” विषय पर आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers – ToT) कार्यक्रम का शुभारम्भ 15 दिसंबर 2025 को एसपीआरसी भवन, पंचायतीराज निदेशालय, देहरादून में हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 18 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए निदेशक, पंचायतीराज उत्तराखंड IAS निधि यादव ने कहा कि पंचायतीराज व्यवस्था को वास्तविक रूप से मजबूत करने के लिए “प्रधान पति” जैसी परंपराओं को समाप्त करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होंगी जब निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्वयं निर्णय प्रक्रिया का नेतृत्व करें और उनके अधिकारों एवं दायित्वों का पूर्ण सम्मान हो।

निदेशक निधि यादव ने ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि पंचायतों को नो-कॉस्ट एवं लो-कॉस्ट नवाचारों को अपनाकर स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान तलाशने चाहिए। उन्होंने पंचायतों की स्थायी समितियों को सक्रिय करने, महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पेंशन सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में पंचायतों में महिलाओं का तकनीकी रूप से सक्षम होना अत्यंत आवश्यक है, जिससे योजनाओं की पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार के विशेष अभियान के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य महिला प्रतिनिधियों के नेतृत्व कौशल, संवाद क्षमता, संवैधानिक समझ तथा स्थानीय प्रशासन संचालन की दक्षता को सुदृढ़ करना है। प्रशिक्षण में कुल 44 प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें सहायक विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, तथा पूर्व एवं वर्तमान पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं।

चार दिवसीय इस ToT प्रशिक्षण के माध्यम से प्रदेश की लगभग 19 हजार महिला पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वयस्क शिक्षा के सिद्धांत, संचार की कला, नेतृत्व एवं प्रभाव, प्रशिक्षण तकनीक, जेंडर एवं पितृसत्ता की अवधारणा, 73वां संविधान संशोधन, पंचायतीराज व्यवस्था, हितधारकों की मैपिंग, फंड–फंक्शन–फंक्शनरी, ग्राम सभा की प्रक्रिया तथा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की भूमिका एवं दायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

उद्घाटन अवसर पर संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी, उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी, संयुक्त निदेशक हिमाली जोशी पेटवाल सहित पंचायतीराज विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।














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