ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया, भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं

वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले के बावजूद अपनी टैरिफ नीति पर अडिग रहते हुए नए कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ अवैध हैं और राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है। कोर्ट ने इन टैरिफ को रद्द करने का आदेश दिया, जिससे अरबों डॉलर के रिफंड का रास्ता खुल गया है।

इस फैसले को बड़ा झटका बताते हुए ट्रंप ने तुरंत व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत की और कोर्ट के फैसले को “भयानक” और “शर्मनाक” करार दिया। उन्होंने कुछ जजों पर “अनपैट्रियोटिक” होने का आरोप लगाया। फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत नया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाने का एलान किया और इसे साइन कर दिया। यह टैरिफ 24 फरवरी से लागू होगा और शुरुआत में 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद कांग्रेस को इसे बढ़ाने या स्थायी बनाने का प्रस्ताव पास करना होगा।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि कुछ वस्तुओं जैसे महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा उत्पाद, दवाइयां, कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, संतरे, टमाटर), फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन पार्ट्स को छूट दी गई है। साथ ही यूएस-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के तहत अनुपालन करने वाले पड़ोसी देशों के कुछ सामान प्रभावित नहीं होंगे।

जब पत्रकारों ने भारत के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते पर इस नए ग्लोबल टैरिफ के प्रभाव के बारे में सवाल किया, तो ट्रंप ने साफ कहा, “भारत के साथ व्यापार समझौते में कुछ नहीं बदलेगा। वे टैरिफ चुकाते रहेंगे, हम नहीं।” व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि भारत सहित उन देशों पर जो पहले टैरिफ डील कर चुके हैं, अब 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू होगा, भले ही पहले समझौते में अलग दर तय हुई हो। इससे पहले अमेरिका-भारत के बीच अंतरिम समझौते में भारत पर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत टैरिफ किया गया था, लेकिन अब यह 10 प्रतिशत पर आ जाएगा।

ट्रंप ने कहा कि यह अस्थायी कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संतुलित करने, व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी श्रमिकों-उद्योगों की रक्षा के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ाएगा और कई देशों के साथ पहले हुए समझौतों पर असर डालेगा।

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