आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट भी बंद

गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के दूसरे दिन शनिवार को आदिकेदारेश्वर मंदिर व आदिगुरू शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हो गए हैं। कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत दूसरे दिन विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आदि केदारेश्वर मंदिर तथा आदि गुरू शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इसके तहत श्री बदरीनाथ मंदिर में भोग लगने के बाद रावल अमरनाथ नंबूदरी ने आदि केदारेश्वर मंदिर में अन्नकूट का भोग चढ़ाया। आदि केदारेश्वर मंदिर के शिवलिंग को पके चावलों से ढ़का गया। तत्पश्चात कपाट बंद हेतु पूजा-अर्चना के बाद आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसी परंपरा के तहत दोपहर बाद आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट भी धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच बंद हो गए।

बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने हेतु  बीकेटीसी की ओर तैयारियां चल रही है। कहा कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के पश्चात शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जायेगा।

आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट एवं अमित बंदोलिया एवं आदि केदारेश्वर मंदिर के पुजारीगणों ने पूजा-अर्चना संपन्न की। इस दौरान बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, पूर्व अपर धर्माधिकारी सत्यप्रकाश चमोला, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, ईओ नगर पंचायत सुनील पुरोहित, थाना प्रभारी नवनीत भंडारी, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट, धड़िया ऋतेश सनवाल, प्रवेश मेहता, विकास सनवाल आदि मौजूद रहे।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि पंच पूजा के  तीसरे दिन रविवार  को पूजा के बाद वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जायेगा। चौथे दिन  24 नवंबर को माता लक्ष्मी जी को आमंत्रण तथा 25 नवंबर  अपराह्न 2 बजकर 56 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे।

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