ज्योतिर्मठ आपदा : ढाई साल बाद भी अधर में प्रभावितों का भविष्य

ज्योतिर्मठ : आपदा की मार झेल रहे ज्योतिर्मठ के पुनर्वास और स्थिरीकरण की सुस्त रफ्तार ने स्थानीय जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। ‘जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति’ ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भेजकर अपनी सात सूत्रीय मांगों को दोहराया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि अप्रैल 2023 में सरकार और समिति के बीच बनी सहमतियों पर जल्द अमल नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता एक बार फिर उग्र आंदोलन के लिए विवश होगी।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि केंद्र सरकार द्वारा जोशीमठ के लिए 1640 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की स्वीकृति के बावजूद जमीन पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। प्रभावित परिवार आज भी अस्थाई शिविरों में रहने को मजबूर हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। समिति का आरोप है कि पिछले ढाई साल से केवल डीपीआर (DPR) के नाम पर जनता को छलावा दिया जा रहा है और एक के बाद दूसरी एजेंसी के सर्वे में जनता के धन का अपव्यय हो रहा है, जबकि ड्रेनेज और सीवेज जैसे महत्वपूर्ण कार्य अभी भी फाइलों में दबे हैं।

ज्ञापन में सात प्रमुख बिंदुओं पर सरकार का ध्यान खींचा गया है। समिति की मुख्य मांग है कि आपदा के कारण हुए व्यावसायिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जल्द मुआवजा वितरण शुरू किया जाए। साथ ही, प्रभावितों के पुनर्वास हेतु भूमि का चयन और भूमि के मूल्य का निर्धारण तत्काल किया जाए। समिति ने व्यावसायिक भवनों, प्रधानमंत्री आवास, होमस्टे और पारंपरिक भवनों के लंबित भुगतान की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूरा करने की मांग की है।

स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों से निर्माण कार्यों पर लगी रोक और इसमें बरती जा रही असमानता पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है। समिति का कहना है कि जहां एक ओर प्रभावितों को छोटे आवास बनाने की अनुमति नहीं है, वहीं दूसरी ओर कुछ सरकारी और निजी निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी हैं। उन्होंने मांग की है कि हल्के और आवश्यक आवासीय निर्माण के लिए एक समान और पारदर्शी नीति बनाई जाए ताकि स्थानीय लोगों के रोजगार और आवास का संकट दूर हो ।

ज्योतिर्मठ के दीर्घकालिक स्थिरीकरण और सुरक्षा कार्यों में पारदर्शिता की मांग करते हुए संघर्ष समिति ने सुझाव दिया है कि इन कार्यों में स्थानीय बेरोजगार श्रमिकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समिति के संयोजक अतुल सती ने सरकार को याद दिलाया कि अप्रैल 2023 में मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें तत्काल लागू किया जाए। प्रभावितों का कहना है कि शहर में आज भी कई स्थानों पर भू-धंसाव सक्रिय है और बड़े गड्ढे उभर रहे हैं, जो किसी बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रहे हैं।

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